Category: Poetry

Chasing light…

I close my eyes
To see the light
In the darkest night

That’s not alright
Losing my sight
Falling inside

You catch me in a flight
And hold me tight
Try escape the plight

I have no might
To walk right
So leave me in a tide

Sailing through the highs
I can see the shore burning bright
Or it’s a fire inside 

Which ignites
To chase the light
However far it invites ...
                                                                                               -Sameer                                                             

                                                            

Someone

I wish someone to understand me well,
As I am the person, you didn’t know that well……

Don’t take me wrong from the thoughts that misplaced,
I can only convince through my eyes that glazed…..

You may dumbfound to know about this matter and the fact,
But that’s what I felt while dreaming about you in zest…..

Forgive me for my acts when I go insane,
Trust me; I only try to make you feel happy and go peppy down the lane…..

It rejuvenates my soul while being with you,
And expects nothing but yells just wanna be with you…..

It seems plausible when you are high in zeal,
Overpowering the darkness engulfing my dreams…..

Though it’s tough for you to back my insight,
Still, I assure you taking safe whenever you are in tide…..

I wish someone once………..

तू ही तो है …

आज अगर दिल टूटा,
कल इसे जोड़ता हूँ।


तू मेरा बंदा है,
तुझे मैं तराशता हूँ।


तू वो नायाब हीरा ,
जिसे मैं अपने सर पे सजाता हूँ।


तेरे मन मंदिर से पाक होकर,
कतरा – कतरा विष का तुझे रोज़ पिलाता हूँ।


भूल मत तेरी हर भावनाओं में,
मैं ही तो समाता हूँ।


रात का भटका, सुबह तेरे ध्यान में,
मस्त – मलंग मैं ही तो आता हूँ।


इस मायाजाल में उलझ कर, तुझे फिर,
सही मार्ग मैं ही तो दिखाता हूँ।


जिस पल तू समझा अब अंत,
उस पल का कायाकल्प हर बार करता हूँ।


तेरे आंशुओं की ज्वाला में,
मैं भी तो जलता हूँ।


क्यूँकि इस काल के आरम्भ से अनंत तक,
तेरा प्रारब्ध मैं ही तो हूँ।


जिस जग को ना भाया तू ,
उस जग को मैं ही तो बनाया हूँ।


तो इस जग के ताप का पश्चाताप क्यूँ करे तू,
जिसे मैं भस्म कर रोज़ लगाता हूँ।।।।

KARMA को पकड़ के क्या रोना…

रोना-धोना, सोना-खोना

ये दिल नहीं है कोई खिलौना,

इसे परेशान मत करना |

~

तू आज में जीना,

दुनिया की छोड़ न,

पर एक बात बताना ?

~

क्या ये वही है न ?

जो तुझे है पाना, 

सोच ले ! इस रिश्ते को है निभाना,

फिर ना बहाने बनाना…

~

अगर नहीं।तो भूलना,

सोचना… दिल में झाँकना |

मन की मान न…

~

अपने रास्ते खुद बनाना,

जग की क्यूँ सुनना ?

अपनी धुन में रहना,

गिरना, उठना, संभलना,

पर कर्मा को पकड़ के मत रोना…।

Sameer

Crumble & Crawl

Crumble & crawl 
Or in a brawl
Curse me for the sins, you think
Took a toll


Dark & gloomy
Alleys never bloomy
You think it's a sham
I call it double whammy


Wax & wane
Pain insane
Love to sustain 
The fire, in bloody vein...(SRS)

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